मंत्री पद की अटकलों के बीच अमर अग्रवाल की विधायकी पर सवाल
खपरगंज की सांप्रदायिक घटना से लेकर जनसमस्याओं तक, कांग्रेस का निशाना; सदन में प्रश्नकाल के दौरान कथित चुप्पी पर उठे सवाल
अनिल शुक्ला की रिपोर्ट
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की चर्चाओं के बीच बिलासपुर शहर के भाजपा विधायक अमर अग्रवाल की सक्रियता पर सवाल उठ रहे हैं। खपरगंज की सांप्रदायिक घटना पर उनकी सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर उठे सवालों और कांग्रेस के कलेक्टर घेराव के बीच अब विधानसभा में जनता के मुद्दे उठाने की उनकी भूमिका भी बहस के केंद्र में है। सोशल मीडिया पर चार मंत्रियों को बदले जाने की अटकलों के बीच अमर अग्रवाल का नाम संभावित दावेदारों में लिया जा रहा है, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
प्रश्नकाल में सवाल नहीं, तो जनता की आवाज कौन उठाएगा?
कांग्रेस पदाधिकारियों ने आरोप लगाया था कि फरवरी-मार्च 2024 से फरवरी-मार्च 2025 के बीच विधानसभा की 44 बैठकों में अमर अग्रवाल ने एक भी प्रश्न नहीं पूछा। यदि आधिकारिक रिकॉर्ड से इसकी पुष्टि होती है, तो यह उनके विधायी प्रदर्शन पर गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रश्नकाल जनसमस्याओं को सरकार के सामने रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि यदि क्षेत्र की समस्याओं पर सदन में सवाल ही नहीं उठाए गए, तो जनता की आवाज सरकार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी कैसे निभाई गई?
शहर के मुद्दों पर भी सक्रियता की मांग
खपरगंज की सांप्रदायिक घटना के बाद विधायक की सार्वजनिक प्रतिक्रिया को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए। वहीं, जिला कांग्रेस कमेटी के कलेक्टर घेराव के बाद भी जनहित के मुद्दों पर उनकी भूमिका को लेकर निशाना साधा गया। कांग्रेस का कहना है कि जनप्रतिनिधि की सक्रियता केवल चुनाव के समय नहीं, बल्कि सामाजिक तनाव और नागरिक समस्याओं के दौरान भी दिखाई देनी चाहिए।
संभावित मंत्रिमंडल फेरबदल की अटकलों के बीच अब राजनीतिक बहस का अहम सवाल यही है—क्या मंत्री पद की दावेदारी से पहले विधायक के तौर पर जनता के मुद्दों पर उनकी सक्रियता का आकलन नहीं होना चाहिए? फिलहाल मंत्रिमंडल फेरबदल की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है और विधानसभा में प्रश्न नहीं पूछने के दावे की पुष्टि आधिकारिक रिकॉर्ड से होना बाकी है।
